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 चाणक्‍य नीति: युवावस्था में इन 5 बातों का रखें ध्यान, जीवन में मिलेगी सफलता

 
 चाणक्‍य नीति: युवावस्था में इन 5 बातों का रखें ध्यान, जीवन में मिलेगी सफलता

Chanakya NIti: आचार्य चाणक्य की नीतियों में युवाओं के लिए कुछ बातें बताई गई हैं। युवावस्था जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है, अगर कोई व्यक्ति इस पड़ाव को ठीक से पार कर लेता है तो उसे भविष्य में किसी भी तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है।

यदि कोई व्यक्ति युवावस्था में गलत हो जाता है तो उसे जीवन भर पछताना पड़ता है। आचार्य चाणक्य यदि इन बातों का पालन किया जाए तो व्यक्ति कभी भी अपने मार्ग से नहीं भटक सकता।

आइए आज जानते हैं आचार्य चाणक्य के विचार-

युवावस्था में व्यक्ति अपना जीवन चुनता है

आचार्य चाणक्य के अनुसार युवावस्था बहुत अधिक महत्वपूर्ण अवस्था होती है। युवावस्था में व्यक्ति को यह चुनना होता है कि उसे कैसे जीना है, युवावस्था में लिए गए इस निर्णय पर ही व्यक्ति का पूरा जीवन निर्भर करता है। इसलिए युवावस्था में व्यक्ति को सतर्क और सतर्क रहना चाहिए। क्योंकि आपके द्वारा लिया गया फैसला या तो आपको बर्बाद कर देगा या फिर आपकी जिंदगी नर्क बन जाएगी।

अच्छे लोगों की संगति में असहनीय हो जाओ

चाणक्य कहते हैं कि संगति का व्यक्ति के जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। अच्छी संगति होना बहुत जरूरी है, खासकर जब आप युवा हों। यदि आपकी संगति अच्छी है तो आपको जीवन में सफलता अवश्य मिलेगी।

आचार्य चाणक्य की नीतियों के अनुसार अच्छी संगति जीवन को नई दिशा देती है और बुरी संगति भविष्य को बर्बाद कर देती है।

शिक्षा के साथ-साथ खेल भी जरूरी है

चाणक्य कहते हैं कि युवावस्था में शिक्षा बहुत जरूरी है। इस उम्र में शिक्षा के साथ-साथ खेलों में भी भाग लेना चाहिए। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खेल भी जरूरी है।

आचार्य चाणक्य की नीतियों के अनुसार खेल मानसिक तनाव को दूर करता है।

नशे से दूर रहें

जवानी में गलत बातें इंसान पर बहुत जल्दी असर करती हैं। अगर आप इस उम्र में गलत आदतें विकसित कर लेते हैं तो आपको जीवन पर संकट का सामना करना पड़ सकता है।

गलत आदतों को छोड़ना आसान लगता है, लेकिन उन्हें छोड़ना काफी कठिन होता है। आचार्य चाणक्य की नीतियों के अनुसार नशा जैसी गलत आदतें वर्तमान के साथ-साथ भविष्य को भी बर्बाद कर देती हैं।

स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए

चाणक्य के अनुसार युवावस्था शरीर को आकार देने का समय है। इस उम्र में आपका शरीर वैसा ही बन जाएगा जैसा आप चाहते हैं।

आचार्य चाणक्य की नीतियों के अनुसार इस उम्र में व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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