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मुगल इतिहास: मुगलों के दौर में महिलाओं को कैसे मिला तलाक लेने का अधिकार?

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Mughal History: मर्दों की मनमानी पर लगी रोक, जानिए मुगलों के दौर में महिलाओं को कैसे मिला तलाक लेने का अधिकार?
 

मुगलों के दौर के रीति-रिवाज चौंकाते हैं. मुगल बादशाह जहांगीर के दौर में एक ऐसा फैसला भी लिया गया जिससे औरतों के अधिकारों बढ़े. इसका किस्सा मुगलकाल के ऐतिहासिक दस्तावेज ‘मजलिस-ए-जहांगीरी’ में दर्ज किया गया. तलाक के मामलों और उसके बाद बदलने वाली औरतों की जिंदगी को लेकर मुगल बादशाह जहांगीर गंभीर थे. इसमें सुधार के लिए उन्होंने कई कदम उठाए, जिससे औरतों को राहत मिली और अधिकार बढ़े.

20 जून 1611 को जहांगीर ने तलाक को लेकर बड़ा ऐलान किया. कहा, अगर कोई मुस्लिम शख्स बिना किसी बड़ी और वाजिब वजह के अपनी बेगम से तलाक लेता है तो उस अलगाव को अवैध माना जाएगा. जहांगीर की घोषणा के बाद काजी ने उस पर मुहर लगाई और इसे कानून की तरह लागू कर दिया गया.

मर्दों की मनमानी पर कितनी रोक लगी?

जहांगीर के इस ऐलान के पहले पुरुषों की जुबान को ही सबकुछ माना जाता था. लेकिन नए ऐलान के बाद महिलाओं ने आवाज उठानी शुरू की. उनकी शिकायतों पर गौर किया जाने लगा.

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जहांगीर के ऐलान के बाद औरतों को खुले तलाक का विकल्प मिला. हालांकि, तलाक को लेकर मर्दों के गुरुर को तोड़ना आसान नहीं था. कई ऐसे मामले सामने आए. 1628 में एक मुस्लिम इंसान ने तलाक लेने के लिए बेगम से 60 महमूदिस सिक्के मांगे. इसके बाद उसने तलाक दिया. हालांकि दस्तावेज में तलाक की वजह नहीं बताई गई.

दूसरा मामला फत बानू से जुड़ा था, जिसने पति चिश्त मोहम्मद से तलाक लेने के लिए काजी के पास अर्जी लगाई. काजी से कहा, मेरा पति शराब पीता है इसलिए उसके पति होने के अधिकार होने छीने जाएं. ऐसा ही हुआ भी. उस दौर में महिलाएं तलाक को लेकर जागरुक होने लगीं. काजी से तलाक की बात करने में बिल्कुल भी हिचकिचाती नहीं थीं.

तीसरा मामला 5 फरवरी 1612 का है. जब मोहम्मद जियू नाम के शख्स ने काजी से पत्नी को तलाक देने की बात कही. जिसके तहत काजी ने पत्नी को रोज एक तांबे का सिक्का, दो कुर्ती और दो साड़ी देने की बात कही. बाद में वो शख्स काजी के पास पहुंचा और शिकायत दर्ज कराई कि उसकी पत्नी ने घर छोड़ दिया है.

शिकायत के उसकी पत्नी काजी के पास पहुंची और कहा- पति ने दस्तावेज पर दस्तखत करते हुए कहा था कि अगर वो हर्जाना नहीं दे पाया तो शादी खत्म मानी जाएगी. पिछले पांच साल में उसने अपने वादे नहीं पूरे किए.

दोनों की बातें सुनने के बाद काजी ने महिला का पक्ष लिया और तलाक पर मुहर लगा दी. इस तरह उस महिला और पति से तलाक मिला. उस दौर में तलाक के ऐसे कई मामले सामने आए. इस तरह जहांगीर के ऐलान के बाद महिलाओं के अधिक बढ़े. उनका पक्ष सुना जाने लगा. उनकी बात काजी के लिए महत्वपूर्ण हो गई.

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