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 न पेट्रोल और न ही सीएनजी, दिल्ली की सड़कों पर दौड़ेगी केवल इलेक्ट्रिक कैब! जानिए क्या है सरकार की योजना

 
ट्रासंपोर्ट डिपार्टमेंट के अनुसार, बीते मार्च महीने में दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी अब तक किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे ज्यादा तकरीबन 15 प्रतिशत है. मार्च महीने में दिल्ली में 7,917 इलेक्ट्रिक वाहन बेचे गए हैं, जिसमें तकरीबन 20 प्रतिशत चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहन और 12 प्रतिशत तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं. बीते महीने राज्य में कुल 53,620 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है, जिसमें ICE इंजन का आंकड़ा शामिल है. डिपार्टमेंट का कहना है कि दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के अन्तर्गत साल भर में 1.12 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई है. इस पॉलिसी को राज्य सरकार द्वारा साल 2020 में लागू किया गया था.   चार्जिंग इंफ्रा को लेकर क्या है प्लान:   कैलाश गहलोत ने मीडिया को बताया कि, "हम तेज गति से और सस्ती कीमतों पर इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार कर रहे हैं. इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक मजबूत बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है. इसके पीछे हमारा मुख्य उद्देश्य दिल्ली को वायु प्रदूषण मुक्त बनाना है और हमने पिछले कुछ वर्षों में अच्छे परिणाम देखे हैं. वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले ये भी बताया गया है कि, एग्रीगेटर ड्राफ्ट पॉलिसी (Aggregator Draft Policy) कानून विभाग द्वारा पारित की गई है और परिवहन विभाग और उपराज्यपाल से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने के लिए तैयार किया जाएगा.  मौजूदा वाहनों का क्या होगा:   दिल्ली में कैब सर्विस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और साथ ही कैब सर्विस प्रदाता कंपनियों के बेड़े में वाहनों की संख्या में भी जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है. इनमें ज्यादातर CNG और पेट्रोल से चलने वाले वाहन ही हैं. इस नए पॉलिसी के तहत पुराने कैब्स को चरणबद्ध तरीके से हटाने का प्रावधान है, जिसका अर्थ है कि अधिसूचना के छह महीने के भीतर एग्रीगेटर्स के बेड़े में लगभग 5% इलेक्ट्रिक होने चाहिए.  इसे नौ महीने के भीतर 15%, एक साल के अंत तक 25%, दो साल के अंत तक 50%, तीन साल के अंत तक 75% और चार साल के अंत तक 100% तक बढ़ाया जाएगा. इस नियम के तहत कैब सर्विस प्रदाता कंपनियों के के बेड़े में 1 अप्रैल, 2030 तक केवल इलेक्ट्रिक वाहन ही रखने का लक्ष्य है. इतना ही नहीं यदि एग्रीगेटर्स इस नियम का पालन नहीं करते हैं तो जुर्माने का भी प्रावधान होगा.   Live TV
 

देश की राजधानी दिल्ली में कैब सर्विस, फूड डिलीवरी सर्विस और ई-कॉमर्स जैसे कंपनियों द्वारा वाहनों के इस्तेमाल के लिए जल्द ही एक नया नियम लागू होने वाला है. दिल्ली ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ऐसे कंपनियों के लिए एक नई एग्रीगेटर पॉलिसी लाने की तैयारी में है, जिसके तहत आगामी 2030 तक राजधानी के सड़कों पर इन कंपनियों को केवल इलेक्ट्रिक वाहन इस्तेमाल करने की अनुमति होगी.  

जल्द ही पारित होने वाले एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत, सभी कैब कंपनियों, फूड डिलीवरी फर्मों और ई-कॉमर्स संस्थाओं को अप्रैल 2030 तक अपने फ्लीट को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक करना अनिवार्य होगा. परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने मीडिया को बताया कि, "दिल्ली में 1 अप्रैल, 2030 तक कैब और अन्य ई-कॉमर्स संस्थाओं के लिए पूरी तरह से इलेक्ट्रिक फ्लीट अनिवार्य कर दिया जाएगा." यानी कि ये संस्थाएं जो मौजूदा समय में पेट्रोल और सीएनजी वाहनों का इस्तेमाल कर रही हैं वो केवल इलेक्ट्रिक वाहन का ही प्रयोग कर सकेंगी.

दिल्ली में बढ़ रही है इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री: 

ट्रासंपोर्ट डिपार्टमेंट के अनुसार, बीते मार्च महीने में दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी अब तक किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे ज्यादा तकरीबन 15 प्रतिशत है. मार्च महीने में दिल्ली में 7,917 इलेक्ट्रिक वाहन बेचे गए हैं, जिसमें तकरीबन 20 प्रतिशत चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहन और 12 प्रतिशत तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं. बीते महीने राज्य में कुल 53,620 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है, जिसमें ICE इंजन का आंकड़ा शामिल है. डिपार्टमेंट का कहना है कि दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के अन्तर्गत साल भर में 1.12 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई है. इस पॉलिसी को राज्य सरकार द्वारा साल 2020 में लागू किया गया था.

चार्जिंग इंफ्रा को लेकर क्या है प्लान: 

कैलाश गहलोत ने मीडिया को बताया कि, "हम तेज गति से और सस्ती कीमतों पर इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार कर रहे हैं. इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक मजबूत बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है. इसके पीछे हमारा मुख्य उद्देश्य दिल्ली को वायु प्रदूषण मुक्त बनाना है और हमने पिछले कुछ वर्षों में अच्छे परिणाम देखे हैं. वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले ये भी बताया गया है कि, एग्रीगेटर ड्राफ्ट पॉलिसी (Aggregator Draft Policy) कानून विभाग द्वारा पारित की गई है और परिवहन विभाग और उपराज्यपाल से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने के लिए तैयार किया जाएगा.

मौजूदा वाहनों का क्या होगा: 

दिल्ली में कैब सर्विस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और साथ ही कैब सर्विस प्रदाता कंपनियों के बेड़े में वाहनों की संख्या में भी जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है. इनमें ज्यादातर CNG और पेट्रोल से चलने वाले वाहन ही हैं. इस नए पॉलिसी के तहत पुराने कैब्स को चरणबद्ध तरीके से हटाने का प्रावधान है, जिसका अर्थ है कि अधिसूचना के छह महीने के भीतर एग्रीगेटर्स के बेड़े में लगभग 5% इलेक्ट्रिक होने चाहिए.

इसे नौ महीने के भीतर 15%, एक साल के अंत तक 25%, दो साल के अंत तक 50%, तीन साल के अंत तक 75% और चार साल के अंत तक 100% तक बढ़ाया जाएगा. इस नियम के तहत कैब सर्विस प्रदाता कंपनियों के के बेड़े में 1 अप्रैल, 2030 तक केवल इलेक्ट्रिक वाहन ही रखने का लक्ष्य है. इतना ही नहीं यदि एग्रीगेटर्स इस नियम का पालन नहीं करते हैं तो जुर्माने का भी प्रावधान होगा. 

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