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रात में तैयारी, सुबह फेरबदल, शाम तक नायब को कमान... ये है खट्टर सरकार बदलने की इनसाइड स्टोरी.

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रात भर तैयारी-सुबह फेरबदल, और शाम तक नायब को कमान… ये है खट्टर सरकार बदलने की Inside story जानिए पूरी खबर
 

हरियाणा के नए सीएम नायब सैनी ने शपथ ले ली है, लेकिन सबके मन में सवाल ये है कि पिछले 24 घंटे में ऐसा क्या हुआ कि बीजेपी को हरियाणा के सीएम मनोहरलाल खट्टर को बदलना पड़ा. ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कल ही पीएम मोदी ने द्वारका एक्सप्रेस-वे के उद्धाटन के दौरान मनोहरलाल खट्टर की जमकर तारीफ की थी. पीएम ने कल कहा था कि वो और खट्टर एक ही मोटरसाइकिल से रोहतक से गुड़गांव आया करते थे. पीएम पीछे बैठते थे और खट्टर मोटरसाइकिल चलाते थे और दोनों पूरा हरियाणा घूमते थे. पीएम ने ये तब की बात बताई जब वो हरियाणा के प्रभारी हुआ करते थे.

माना जा रहा है कि मनोहरलाल खट्टर को बदलने का फैसला बीजेपी ने यूं ही नहीं ले लिया. राज्य में बीजेपी के सर्वे लगातार ये बता रहे थे कि जाट वोटरों की नाराजगी बीजेपी पर भारी पड़ सकती है. इसके साथ ही महिला पहलवानों, किसानों की नाराजगी भी बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकती है. खट्टर से बीजेपी के कार्यकर्ताओं की नाराजगी गाहे बगाहे सामने आती रही है.

ये है जेजेपी से गठबंधन तोड़ने की वजह

करीब दस साल पहले मनोहरलाल खट्टर को सीएम बनाकर बीजेपी ने साफ कर दिया था कि वो हरियाणा में गैर जाट की ही राजनीति करेगी. बीजेपी के सर्वे बता रहे थे कि जाट वोटर एक मुश्त कांग्रेस के साथ जा सकता है जो हरियाणा की 4 से 5 लोकसभा सीटों पर बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकता है. बीजेपी को जाट वोट की उम्मीद उतनी नहीं है पर जाट वोटर एग्रेसिव होता है जो दूसरे तबके के वोटरों को भी प्रभावित कर सकता है.

यही वजह है कि बीजेपी पिछले 6 से 8 महीने पहले से ही चाहती थी कि दुष्यंत चौटाला की जेजेपी गठबंधन से बाहर होकर चुनाव लड़े, क्योकि दोनों दल अगर साथ लड़ते तो जाटों का वोट ना बीजेपी को मिलता ना जेजेपी को और सारा जाट वोटर कांग्रेस के पास चला जाता, लेकिन दुष्यंत चौटाला इसके लिए तैयार नहीं हो रहे थे. बीजेपी दुष्यंत चौटाला को बर्खास्त भी नहीं करना चाहती थी क्योकि इससे गलत राजनीतिक संदेश जाता.

जेजेपी से अलग होना चाहती थी भाजपा

बीजेपी जेजेपी से अलग होना चाहती थी पर वह गठबंधन तोड़ने का आरोप भी अपने ऊपर नहीं लेना चाहती थी. इसकी वजह ये थी कि एक तो बीजेपी को लेकर आरोप लगता कि सहयोगी को साथ नहीं रख पाई दूसरा जाटों में मैसेज जाता कि बीजेपी ने एक और जाट नेता और जाट पार्टी से संबंध तोड़ लिया. कल सोमवार को जब दुष्यंत चौटाला ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने का वक्त मांगा तो बीजेपी को अपने हरियाणा प्लान को अमल में लाने का मौका मिल गया.

दुष्यंत चौटाला ने की थी नड्डा से मुलाकात

दुष्यंत चौटाला ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और अमित शाह से मिलने का वक्त मांगा था. कल दोपहर दुष्यंत चौटाला की बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात हुई. मुलाकात में चौटाला ने गठबंधन के तहत दो लोकसभा सीटें मांगीं. ये सीटें थी- हिसार और भिवानी-महेंद्रगढ़. जेपी नड्डा ने चौटाला को कहा कि आपकी मांग पर हम आगे चर्चा करके जवाब देंगे.

पीएम मोदी के सामने रखा गया पूरा मामला

शाम को बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई. बैठक खत्म होने के बाद पीएम मोदी, जेपी नड्डा और अमित शाह की अलग से बैठक हुई. चूंकि खट्टर पीएम के पसंदीदा सीएम हैं, ऐसे में पीएम के सामने सारा मामला रखा गया. पीएम ने हरियाणा प्लान को हरी झंडी दी जिसमें तय हुआ कि हरियाणा की पूरी कैबिनेट का सामूहिक इस्तीफा होगा , नया गैर जाट सीएम बनेगा और नई सरकार में जेजेपी नहीं होगी. इसी बैठक में ये तय हुआ कि गैर जाट 80 और जाट 20 प्रतिशत के अनुपात वाले राज्य में बीजेपी गैर जाट की ही राजनीति करेगी.

अब इस प्लान को अमल में लाने की तैयारी

बीजेपी महासचिव तरूण चु्ग जो कि तेलंगाना की सीटों को लेकर चुनाव समिति की चर्चा में शामिल होने के बाद घर जा चुके थे उनको रात 11:30 बजे करीब बीजेपी ऑफिस बुलाया गया. उनको बताया गया कि पर्यवेक्षक बनकर उनको मंगलवार को चंडीगढ जाना है. दूसरे पर्यवेक्षक अर्जुन मुंडा को भी फोन करके जानकारी दी गई, फिर दुष्यंत चौटाला को फोन करके मिलने को कहा गया. इसके बाद रात 12:30 बजे अमित शाह, जेपी नड्डा की दुष्यंत चौटाला से मुलाकात हुई. दुष्यंत चौटाला ने अपनी सीटों की मांग दोहराई तो उनको बताया गया कि गठबंधन का जो आगे विचार होगा उससे आपको अवगत कराया जायेगा.

बीजेपी की ये रणनीति!

बीजेपी का मानना है कि दुष्यंत के अलग चुनाव लड़ने से जाट वोटों में सेध पड़ेगी है और इससे जाट वोट एक तरफा भूपेंद्र हुड्डा की अगुवाई वाली कांग्रेस को नहीं मिलेंगे. यानी 6-7 सीटों पर जाट वोंटों का बंटवारा होगा ऐसे में त्रिकोणीय मुकाबले का फायदा बीजेपी को मिलेगा. बीजेपी का आकलन है कि सीएम बदलने का फायदा बीजेपी को लोकसभा चुनाव में होगा. कार्यकर्ताओं की नाराजगी, जनता की नाराजगी, किसानों की नाराजगी और एंटी-इंकंबेंसी मौजूदा सीएम के हटने से कम होगी. साथ ही जाटों की नाराजगी भी कुछ हद तक सीएम बदलने से कम होने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि बीजेपी हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को करनाल से लोकसभा चुनाव में उतारा जा सकता है. भविष्य में सरकार और संगठन में उन्हें बड़ी भूमिका दी जा सकती है.

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