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 Haryana pollution:हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में विशेषज्ञों के 481 पदों में 303 पड़े खाली, NGT हुआ सख्त; दिए अहम निर्देश

 हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में 481 पदों में 303 खाली हैं। नेशनल हरित अथॉरिटी ने इस पर नाखुश जाहिर की है। एनजीटी ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।
 
NGT ने बोर्ड को लगाई फटकार इसके जवाब में बोर्ड की ओर से जानकारी दी गई कि 151 पदों को भरने के लिए हरियाणा लोक सेवा आयोग को मांग पत्र भेजा गया है। इस पर एनजीटी ने बोर्ड को फटकार लगाते हुए कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थापित प्रयोगशालाओं में पर्यावरण क्षतिपूर्ति निधि का उपयोग किया जा सकता है। एनजीटी एक्ट की धारा 33 के मद्देनजर इस संबंध में केंद्र/राज्य सरकार की मंजूरी की जरूरत नहीं होती है।  वहीं, प्रदेश सरकार की ओर से यमुना व घग्गर नदी में बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को औद्योगिक इकाइयों के अपशिष्ट के निस्तारण पर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा राज्य आधारभूत औद्योगिक अवसंरचना विकास निगम, शहरी निकाय और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों की समिति संयुक्त रूप से काम करेगी। यमुना कैचमेंट के 276 गांवों में 75 एमएलडी सीवेज के उपचार/डायवर्जन के लिए कार्य योजना तैयार की गई है। इसमें से 118 गांवों में काम पूरा हो चुका है और 130 गांवों में काम चल रहा है।  चार एसटीपी जल्द होंगे शुरू प्रदेश में चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम पूरा कर लिया गया है। इन्हें जल्द ही चालू किया जाएगा। इनमें पीर बोधी रोहतक में 15 एमएलडी, जोधपुर रोड पलवल में 15 एमएलडी, फिरोजपुर रोड पलवल में 2.5 एमएलडी और रोहतक में 10 एमएलडी क्षमता वाला एसटीपी लगाया गया है। इसके साथ ही यमुना नदी जलग्रहण क्षेत्र में 340 एमएलडी क्षमता के चार एसटीपी लगाने की योजना है। इनका कार्य दिसंबर 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा। सोनीपत में 20.2 एमएलडी क्षमता के तीन सीईटीपी का उन्नयन किया जा रहा है। फरीदाबाद में 126.5 एमएलडी की क्षमता वाले सात एसटीपी के साथ ही गुरुग्राम और सोनीपत जिलों में एक-एक एसटीपी प्रस्तावित हैं।
 

चंडीगढ़, राज्य ब्यूरो। हरियाणा में प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी उठा रहा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड खुद स्टाफ के संकट से जूझ रहा है। बोर्ड की प्रयोगशालाओं में विशेषज्ञों की कमी है। प्रयोगशालाएं भी अपग्रेड नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण के स्तर के सटीक आकलन नहीं हो पा रहा। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने इस पर नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि रिक्त पदों को भरने की प्रकिया तुरंत शुरू की जाए।


रिक्त पदों को भरने, प्रयोगशालाओं को अपग्रेड करने और प्रदूषण को रोकने के लिए तैयार कार्य योजना पर तीन महीने के भीतर सरकार को रिपोर्ट एनजीटी को देनी होगी। पर्यावरणविद वरुण गुलाटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में स्टाफ की कमी को लेकर एनजीटी में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता के मुताबिक बोर्ड में विशेषज्ञों के 481 पद स्वीकृत हैं, जबकि 178 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। इस तरह 303 पद रिक्त पड़े हैं। इससे प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी कार्य योजना तैयार नहीं हो पा रही है।

NGT ने बोर्ड को लगाई फटकार

इसके जवाब में बोर्ड की ओर से जानकारी दी गई कि 151 पदों को भरने के लिए हरियाणा लोक सेवा आयोग को मांग पत्र भेजा गया है। इस पर एनजीटी ने बोर्ड को फटकार लगाते हुए कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थापित प्रयोगशालाओं में पर्यावरण क्षतिपूर्ति निधि का उपयोग किया जा सकता है। एनजीटी एक्ट की धारा 33 के मद्देनजर इस संबंध में केंद्र/राज्य सरकार की मंजूरी की जरूरत नहीं होती है।

वहीं, प्रदेश सरकार की ओर से यमुना व घग्गर नदी में बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को औद्योगिक इकाइयों के अपशिष्ट के निस्तारण पर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा राज्य आधारभूत औद्योगिक अवसंरचना विकास निगम, शहरी निकाय और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों की समिति संयुक्त रूप से काम करेगी। यमुना कैचमेंट के 276 गांवों में 75 एमएलडी सीवेज के उपचार/डायवर्जन के लिए कार्य योजना तैयार की गई है। इसमें से 118 गांवों में काम पूरा हो चुका है और 130 गांवों में काम चल रहा है।

चार एसटीपी जल्द होंगे शुरू

प्रदेश में चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम पूरा कर लिया गया है। इन्हें जल्द ही चालू किया जाएगा। इनमें पीर बोधी रोहतक में 15 एमएलडी, जोधपुर रोड पलवल में 15 एमएलडी, फिरोजपुर रोड पलवल में 2.5 एमएलडी और रोहतक में 10 एमएलडी क्षमता वाला एसटीपी लगाया गया है। इसके साथ ही यमुना नदी जलग्रहण क्षेत्र में 340 एमएलडी क्षमता के चार एसटीपी लगाने की योजना है। इनका कार्य दिसंबर 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा। सोनीपत में 20.2 एमएलडी क्षमता के तीन सीईटीपी का उन्नयन किया जा रहा है। फरीदाबाद में 126.5 एमएलडी की क्षमता वाले सात एसटीपी के साथ ही गुरुग्राम और सोनीपत जिलों में एक-एक एसटीपी प्रस्तावित हैं।


 

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