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 ईएमआई बढ़ी: आप टमाटरों की किश्तों में उलझकर रह गए, उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े बैंक ने दिया कर्ज का झटका

 
जानिए क्या है MCLR रेट MCLR वह न्यूनतम ब्याज दर होती है, जिसके नीचे कोई भी बैंक लोन नहीं दे सकता है. बैंकों के लिए हर महीने अपना ओवरनाइट, एक महीने, 3 महीने, 6 महीने, एक साल और 2 साल के एमएसीएलआर की घोषणा करना जरूरी होता है.  एमएसीएलआर में इजाफा होने का मतलब है मार्जिनल कॉस्ट से जुड़े कर्ज जैसे- होम लोन, गाड़ियों के लोन पर इंटरेस्ट रेट बढ़ जाएगा. इसकी गणना लोन ड्यूरेशन के आधार पर होती है. इसका मतलब है कि  कर्जदाता को लोन अदा करने में कितना समय लगता है इसके आधार पर इसका कैलकुलेशन होता है.
 

Loan Interest Rate Hike: देश में दिन-ब-दिन बढ़ती महंगाई ने लोगों के हाल बेहाल कर रखे हैं. उधर टमाटर, सब्जियों और दाल-चावल की कीमतों ने जनता को रूलाकर रखा है. जी हां, लोग आप टमाटर की कीमतों में ही उलझकर रह गए हैं. वहीं, एसबीआई के कर्जदारों के लिए बुरी खबर है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने इंटरेस्ट रेट में इजाफा कर दिया है, जिसका सीधा असर आपके होम लोन की ईएमआई पर पडे़गा. 

एसबीआई ने मार्जिनल कॉस्ट आधारित ब्याज दर (MCLR) में 0.05 प्रतिशत का इजाफा किया है. जानकारी के मुताबिक MCLR में बढ़ोतरी सभी अवधि के लोन के लिए हुई है. बैंक के इस फैसले से सभी तरह के कर्जदारों पर EMI का बोझ बढ़ जाएगा.

SBI ने MCLR दरों में कर दी बढ़ोतरी 


स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से शुक्रवार को MCLR में 0.05 फीसदी की बढ़ोतरी कर लोन होल्डर्स को बड़ा झटका दिया है. ब्याज दर बढ़ने से लोन लेना महंगा हो जाएगा और लोगों पर ईएमआई का बोझ बढ़ जाएगा. ये नई दरें 15 जुलाई 2023 से लागू होनी हैं. 

जानकारी के मुताबिक भारतीय स्टेट बैंक के इस फैसले के बाद ओवरनाइट MCLR 7.95 फीसदी से 8 फीसदी हो गई है. वहीं, अब यह एक महीने के लिए 8.15 प्रतिशत, 3 महीने के लिए 8.15 प्रतिशत, 6 महीने के लिए 8.45 प्रतिशत, 1 साल में 8.55 प्रतिशत, 2 साल में 8.65 प्रतिशत और 3 साल के लिए 8.75 प्रतिशत कर दिया है. 

यह भी जान लें


एसबीआई के इस फैसले का असर फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट पर लोन लेने वाले कस्टमर्स पर होगा न कि फिक्स्ड इंटरेस्टर रेट पर. एमएसीएलआर बढ़ने के बाद ईएमआई रीसेट डेट पर ही बढ़ेगी. एमएसीएलआर रेट बढ़ने से होम और व्हीकल लोन महंगा हो जाएगा.

जानिए क्या है MCLR रेट


MCLR वह न्यूनतम ब्याज दर होती है, जिसके नीचे कोई भी बैंक लोन नहीं दे सकता है. बैंकों के लिए हर महीने अपना ओवरनाइट, एक महीने, 3 महीने, 6 महीने, एक साल और 2 साल के एमएसीएलआर की घोषणा करना जरूरी होता है.

एमएसीएलआर में इजाफा होने का मतलब है मार्जिनल कॉस्ट से जुड़े कर्ज जैसे- होम लोन, गाड़ियों के लोन पर इंटरेस्ट रेट बढ़ जाएगा. इसकी गणना लोन ड्यूरेशन के आधार पर होती है. इसका मतलब है कि  कर्जदाता को लोन अदा करने में कितना समय लगता है इसके आधार पर इसका कैलकुलेशन होता है.

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