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5 साल में इस बार सबसे देर से आएगा मानसून: कल से तपेगी धरती, राजस्थान में पहली बार बिपार्जॉय के कारण हुई अनोखी घटनाएं

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मानसून
 

Public Haryana News : 5 दिन से राजस्थान में तबाही मचा रहे बिपरजॉय तूफान का असर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। माना जा रहा है कि कल यानी 22 जून से बिपरजॉय का असर राजस्थान में पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

भास्कर ने एक्सपट्‌र्स के जरिए बिपरजॉय का एनालिसिस किया तो सामने आया कि इस तूफान के कारण कई ऐसी घटनाएं हुईं, जो इससे पहले राजस्थान में नहीं हुई थीं…।

  • मानसून से पहले ही इतनी बारिश हो गई, जितनी कई बार सालभर में नहीं हो पाती।
  • जालोर, साचौर, पाली सहित कई जिलों और इलाकों में 500 एमएम तक पानी बरसा। पहली बार राजस्थान के 5 जिलों ने बिना मानसून की बाढ़ देखी।
  • राजस्थान के 52 से ज्यादा बांध भर चुके हैं। बीसलपुर बांध में भी पानी की आवक शुरू हो गई।
  • पश्चिमी राजस्थान के 5 जिलों को हटा दें तो बाकी जगह बिपरजॉय से किसानों को फायदा पहुंचेगा। मानसून से पहले ही किसान अब खरीफ की फसलों की बुआई शुरू कर सकेंगे।

मानसून से पहले सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड

पहली बार ऐसा हुआ है कि मानसून से पहले इतनी बारिश हुई हो। राजस्थान में पिछले तीन दिनाें का रिकाॅर्ड देखें तो सिरोही के शिवगंज में 675 एमएम, पाली के मुठाना में 669, जालोर के आहोर में 657, माउंट आबू में 658, जालोर में 590, पाली के फुटिया में 555, काना और मिठडी में 528, कोट में 522, सिरोही के केर में 525 एमएम पानी गिरा। इसके अलावा राजसमंद, बाड़मेर, टाेंक के नगरकोर्ट में भी काफी अच्छी बारिश हुई है। बाड़मेर और जैसलमेर पूरी तरह से रेगिस्तान इलाके है,लेकिन इसके बावजूद दोनों जिलों में काफी अच्छी बरसात हुई है। कई जिले ऐसे भी हैं, जहां पर 400 एमएम तक बरसात हुई है।

बिपरजॉय से राजस्थान के कई बांध छलके

राजस्थान में मानसून से पहले बिपरजॉय के कारण कई बांध अभी से छलकने लगे हैं। राजस्थान में छोटे-बड़े बांध मिलाकर कुल 690 बांध हैं। इनमें 278 बड़े और 412 छोटे बांध हैं। अभी 52 बांध लबालब हो चुके हैं। इसके अलावा ऐसे भी बांध है, जोकि भरने की कगार पर हैं। टाेंक के बीसलपुर बांध में भी 21 सेंटीमीटर से अधिक पानी पहुंचा है। यह जयपुर,अजमेर, टोंक की 21 दिनों तक प्यास बुझाने के लिए काफी है।

आगे क्या : 22 जून से साफ हो जाएगा आसमान

बिपरजॉय का असर करौली, धौलपुर, भरतपुर के अलावा कई जिलों में अभी 21 जून तक रहेगा। इसके अलावा अधिक बरसात के कारण वातावरण में काफी नमी बनी हुई है, जिससे भी कहीं-कहीं हल्की से तेज बरसात होगी। 22 जून से आसमान पूरी तरह से साफ हो जाएगा।

हालांकि दो दिन के बाद पूर्वी राजस्थान को लेकर अलर्ट मैसेज किया है। 24 और 25 जून को एक वेदर सिस्टम् एक्टिव हो रहा है। इससे पूर्वी राजस्थान के करौली, धौलपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा सहित जयपुर आसपास में बारिश का दौर रहेगा। इसके बाद तापमान में बढ़ोतरी शुरू हो जाएगी और गर्मी का दौर चलेगा।

मानसून में 15 दिन की देरी

अभी पूरे देश में मानसून 8 से 10 दिन देरी से चल रहा है। पहले राजस्थान में 20 जून तक मानसून एक्टिव होने का अनुमान था, लेकिन बिपरजॉय के कारण गणित बिगड़ गया। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान में मानसून की एंट्री जुलाई के पहले सप्ताह के अंत तक में हो सकती है। जुलाई के दूसरे सप्ताह में मानसून पूरी तरह एक्टिव होगा।

अगर ऐसा होता है तो ये पांच साल में सबसे देरी से आना वाला मानसून होगा। साल 2018 में मानसून जून माह के आखिरी सप्ताह में 27 जून को आया था। 2019 में 3 जुलाई को प्रदेश में मानसून की एंट्री हुई थी। 2020 में 24 जून, साल 2021 में 18 जून को मानसून की एंट्री हुई थी। पिछले साल यानी 2022 में 30 जून को मानसून ने राजस्थान में दस्तक दी थी।

अब तापमान बढ़ने से बढ़ेगी गर्मी

बिपरजॉय का असर खत्म होने के बाद 22 जून से धीरे-धीरे तापमान बढ़ने लगेगा। मौसम केंद्र का मानना है कि एक बार फिर 40 डिग्री तक तापमान बढ़ने की संभावना है। तेज गर्मी बनी रहेगी। साथ ही नमी होने के कारण उमस भी काफी बनी रहेगी। मानसून एक्टिव होने के बाद ही गर्मी से राहत मिल सकेगी।

ताउ-ते के बाद सबसे अधिक एक्टिव

पिछले 10 सालों में राजस्थान में 2021 में आए ताउ-ते तूफान का ही ज्यादा असर रहा था। ताउ-ते गुजरात से टकरा कर सीधे सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, चितौड़गढ़ से जयपुर तक करीब 8 जिलों में 14 मई से 19 मई 2021 तक एक्टिव रहा था। वहीं, बिपरजॉय की बात करें तो 16 जून से राजस्थान के पांच से ज्यादा जिलों में इसका प्रभाव है। 4 जिलों में बाढ़ के हालत बन गए। बिपरजॉय का असर 21 जून तक रहेगा।

पिछले 10 सालों में अरब सागर से उठे 20 चक्रवात

बिपरजॉय अरब सागर से निकला अब तक का सबसे ताकतवर तूफान है। 13 दिन से बिपरजॉय एक्टिव है। राजस्थान के बाद इसका असर मध्यप्रदेश, हरियाणा और दिल्ली तक पहुंच गया है। अरब सागर से पिछले 10 सालों में करीब 20 चक्रवात बने हैं, जिनमें नीलोफर, वायु, ताउ-ते और बिपरजॉय का ज्यादा असर रहा है। इन चारों का पश्चिमी राजस्थान पर भी असर पड़ा है। बाकी के 16 चक्रवात अरब सागर से निकल कर यमन, ओमान और सोमालिया की ओर निकल गए थे।

कौन-कौन से चक्रवात हुए एक्टिव

  • कीला चक्रवात : अरब सागर में कीला तूफान 29 अक्टूबर 2011 को एक्टिव हुआ था। जोकि 4 नवम्बर 2011 तक एक्टिव रहा था। ये अरब सागर से निकल कर यमन से टकराया था। भारत में इसका कोई असर नहीं हुआ था।
  • मुर्जन चक्रपात : 23 दिसम्बर से 26 दिसम्बर तक 4 दिनों तक अरब सागर में 2012 में एक्टिव रहा था। ये सोमालिया में टकराया था।
  • नानुक चक्रपात : 10 जून से 14 जून 2014 तक एक्टिव रहा था। अरब सागर से निकल कर ओमान के पास आकर अरब सागर में ही खत्म हो गया था।
  • नीलोफर : अरब सागर से निकल कर 25 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2014 तक 7 दिनाें तक ये तूफान एक्टिव रहा था। 205 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली थी। इसका सांचोर, जालोर, बाड़मेर, सिरोही, पाली सहित कई जिलाें में असर रहा था। ये काफी ताकतवर था।
  • अशोबा : 7 जून से 12 जून 2015 तक एक्टिव रहा था। अरब सागर से निकल कर ओमान की ओर चला गया था। ये लक्ष्यद्वीप के पास उठा था।
  • छपाला : अरब सागर से उठा ये तूफान 28 अक्टूबर से 4 नवम्बर तक रहा था। ये यमन की ओर चला गया था। इसके तुरंत बाद मेघा 5 नवम्बर को नया साइक्लोन एक्टिव हो गया, जो 10 नवम्बर तक रहा था। इसके बाद ये भी यमन की ओर चला गया था।
  • सागर : 16 मई से 21 मई 2018 में सागर साइक्लोन एक्टिव हुआ था। ये सोमालिया और इथोपिया की ओर चला गया था। फिर 21 मई से 27 मई तक 2018 में एक नया साइक्लोन मेकुनू एक्टिव हुआ था। 95 किलोमीटर की रफ्तार से हवाएं चली थी। इसका तीन देशों में असर रहा था।
  • लुभान : 6 सितम्बर से 15 अक्टूबर 2018 तक अरब सागर में लुभान साइक्लोन एक्टिव रहा था। ये 10 दिनों तक एक्टिव रहा था। इसके बाद यमन की ओर चला गया था।
  • वायु : 9 जून से 17 जून 2019 तक 8 दिनों तक एक्टिव रहा था। अरब सागर से निकल कर गुजरात से टकराया था। फिर पश्चिमी राजस्थान में करीब 7 जिलों में सक्रिय रहा था।
  • हीका: ये साइक्लोन 22 सितम्बर से 25 सितम्बर तक 4 दिनों तक एक्टिव रहा था। ये तूफान यमन और सोमालिया में टकराया था।
  • क्यार : ये साइक्लोन 24 अक्टूबर से 2 नवम्बर तक एक्टिव रहा था। महाराष्ट्र के पास ये साइक्लोन एक्टिव हुआ था और सोमालिया में जाकर टकराया था।
  • महा साइक्लोन : अरब सागर से उठा ये तूफान 30 अक्टूबर से 7 नवम्बर 2019 एक्टिव रहा था। 2019 में ही पवन साइक्लोन 2 दिसम्बर से 7 दिसम्बर तक एक्टिव रहा था। जो अरब सागर से निकल सोमालिया चला गया था।
  • गति : 21 नवम्बर से 24 नवम्बर 2020 तक अरब सागर में गति साइक्लोन एक्टिव रहा था। वहीं निसारगा साइक्लोन 1 जून से 4 जून 2020 तक एक्टिव रहा था। इनका भी भारत में कोई असर नहीं रहा था।
  • ताउ-ते : 14 मई से 19 मई 2021 तक ताउते साइक्लोन एक्टिव रहा था। ये गुजरात से टकरा कर राजस्थान में आया था। इसके बाद शाहीन 30 अक्टूबर से 4 नवम्बर तक एक्टिव रहा था।

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